रिपोर्ट को फिलहाल गोपनीय रखा गया है। हालाँकि, इसके बावजूद इसके कुछ हिस्से लीक हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि आयोग ने रिपोर्ट में दंगे कब हुए थे, इसकी जानकारी दी है? इसमें जान-माल का कितना नुकसान हुआ था? बताया गया है कि 1947 के बाद साल 2024 तक संभल में लगभग 15 दंगे हो चुके हैं। ये दंगे 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1974, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001, 2019 और फिर 2024 में हुए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संभल कई अराजकतावादियों और आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों का बड़ा अड्डा है। यहाँ हुए दंगों में विदेशी हथियारों के इस्तेमाल के सबूत भी मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि जाँच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यहाँ तेज़ी से जनसांख्यिकीय परिवर्तन हुआ है। कभी यहाँ 45 प्रतिशत हिंदू आबादी थी, जो अब घटकर सिर्फ़ 15 से 20 प्रतिशत रह गई है। जबकि आज़ादी के समय संभल में मुसलमानों की आबादी लगभग 55% थी, जो हाल के वर्षों में बढ़कर लगभग 85% हो गई है।
पिछले साल मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान संभल में दंगा हुआ था। इसके बाद सरकार ने जाँच के लिए एक न्यायिक जाँच आयोग का गठन किया था। इस आयोग में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा, सेवानिवृत्त आईएएस अमित मोहन, सेवानिवृत्त आईपीएस अरविंद कुमार जैन शामिल थे।

